Ramkali Halba Self Reliance:रायपुर/बालोद। कहते हैं अगर इंसान के हौसले बुलंद हों, तो कोई भी शारीरिक या मानसिक बाधा उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की एक ऐसी ही जीवटता की मिसाल हैं श्रीमती रामकली हलबा (Mrs. Ramkali Halba)। उन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता (Disability) को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इसे अपनी ताकत बनाकर आज वे पूरे समाज के लिए आत्मनिर्भरता (Self-Reliance) का एक जीता-जागता उदाहरण बन गई हैं।
मुश्किलों भरा था शुरुआती सफर
रामकली हलबा का जीवन कभी आसान नहीं था। शारीरिक रूप से दिव्यांग होने के कारण उन्हें समाज और दैनिक जीवन में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अक्सर लोग दिव्यांगता को लाचारी समझ लेते हैं, लेकिन रामकली ने इस सोच को चुनौती दी। उन्होंने तय किया कि वह किसी पर बोझ नहीं बनेंगी, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी होकर अपने परिवार का सहारा बनेंगी।
सरकारी योजनाओं ने दी सपनों को उड़ान
रामकली की इस दृढ़ इच्छाशक्ति को सही दिशा तब मिली, जब वह राज्य सरकार की आजीविका मिशन और ‘बिहान’ (Bihan) योजना जैसी महिला सशक्तिकरण की पहलों के संपर्क में आईं।
- स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव: उन्होंने स्थानीय महिलाओं के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह (Self-Help Group) की सदस्यता ली।
- स्वरोजगार की शुरुआत: समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक मदद और मार्गदर्शन मिला, जिसकी बदौलत उन्होंने अपना खुद का छोटा व्यवसाय (सिलाई/किराना/हस्तशिल्प) शुरू किया।
आज परिवार का उठा रही हैं पूरा खर्च
रामकली आज अपने व्यवसाय से हर महीने अच्छी खासी आमदनी कर रही हैं। जिस महिला को कभी लोग दया की दृष्टि से देखते थे, आज वही महिला अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा और परिवार का पूरा भरण-पोषण खुद कर रही है। उनका आत्मविश्वास देखकर आसपास के गांवों की अन्य महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं।
रामकली हलबा का साफ कहना है कि “दिव्यांगता केवल शरीर में हो सकती है, अगर इंसान का मन और हौसला मजबूत हो, तो वह दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है।” छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग ने भी उनकी इस अदम्य भावना को सलाम करते हुए उन्हें समाज के लिए एक ‘प्रेरक आदर्श’ (Exemplar) बताया है।
