US Israel War on Iran:पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध की आग लगातार भड़कती जा रही है। अमेरिका और इज़रायल (US-Israel) द्वारा ईरान (Iran) पर किए जा रहे सैन्य हमलों के आज 60 दिन पूरे हो गए हैं। दो महीने से जारी इस भीषण युद्ध के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी बड़ी हलचलें हो रही हैं। एक तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची (Abbas Araghchi) रूस पहुंचे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान के एक नए शांति प्रस्ताव से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं।
ईरान का शांति प्रस्ताव और ट्रंप की नाराजगी
इस युद्ध का सबसे बड़ा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है, क्योंकि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है।
- अल-जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और युद्ध रोकने के लिए एक नया शांति प्रस्ताव दिया है।
- हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने ‘परमाणु कार्यक्रम’ पर फिलहाल कोई बातचीत नहीं करेगा।
- द न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस प्रस्ताव से बेहद नाखुश हैं। ट्रंप की ‘नेशनल सिक्योरिटी टीम’ प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है, लेकिन ट्रंप ने अपने सलाहकारों से साफ कहा है कि कोई भी बातचीत ईरान के ‘परमाणु कार्यक्रम’ से ही शुरू होनी चाहिए।
रूस से मिली मदद, अरागची ने पुतिन को कहा धन्यवाद
वैश्विक कूटनीति में खुद को अलग-थलग पड़ने से बचाने के लिए ईरान लगातार रूस के संपर्क में है।
- ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सेंट पीटर्सबर्ग जाकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से मुलाकात की।
- इस मुलाकात के दौरान अरागची ने कठिन समय में ईरान का समर्थन करने के लिए पुतिन और रूस का आभार जताया।
- अरागची ने यह भी पुष्टि की है कि तेहरान अमेरिका के उस अनुरोध पर विचार कर रहा है, जिसमें रुकी हुई वार्ता को दोबारा शुरू करने की पेशकश की गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया में हाहाकार
ईरान-अमेरिका के इस टकराव ने वैश्विक व्यापार की कमर तोड़ दी है। दुनिया के 20 प्रतिशत तेल की आवाजाही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होती है।
- यूएन महासचिव अंतोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि इस टकराव से भयंकर ‘वैश्विक खाद्य संकट’ पैदा हो सकता है।
- ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा है कि इस संकट का सबसे बुरा असर एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।
- हजारों मालवाहक जहाज समुद्र में फंसे हुए हैं और ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमत बढ़कर 108.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
इस बीच, लेबनान मोर्चे पर भी इजरायल और हिजबुल्लाह (Hezbollah) के बीच भारी गोलाबारी जारी है, जिससे पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही हैं।
