Hormuz Strait Opening News:भारतीय तेल कंपनियों, आयातकों और निर्यातकों के लिए एक बेहद शानदार खबर सामने आई है। लगभग 45 दिनों की रुकावट के बाद होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया है। 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद से यह अहम समुद्री मार्ग बंद था, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट का डर सताने लगा था। लेकिन अब होर्मुज के खुलने से भारत को एक बड़ी राहत मिली है। कच्चे तेल, एलपीजी, एलएनजी और फर्टिलाइजर से लदे 41 जहाज भारत की ओर आने के लिए पूरी तरह तैयार खड़े हैं।
भारत आने वाले 41 जहाजों में क्या है खास?
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक ऐसा चोकपॉइंट है जहां से वैश्विक आपूर्ति का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल और लगभग एक तिहाई गैस गुजरती है। इसका खुलना भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बहुत अहम है।
- टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत आ रहे इन 41 जहाजों में 26 विदेशी और 15 भारतीय जहाज शामिल हैं।
- इन जहाजों में देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला कच्चा तेल, एलपीजी, फर्टिलाइजर और एलएनजी लदा हुआ है।
- भारत में आगामी खरीफ सीजन की बुवाई अगले कुछ महीनों में शुरू होने वाली है, जिसके लिए फर्टिलाइजर (उर्वरक) बहुत जरूरी है। एक दर्जन से अधिक जहाजों में सिर्फ फर्टिलाइजर भरा है।
- इसके अलावा, 15 भारतीय जहाजों में से 10 में कच्चा तेल, 4 में एलपीजी और 3 में एलएनजी मौजूद है।
कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट
होर्मुज स्ट्रेट के खुलने की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में तुरंत नरमी देखने को मिली है। कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 9 फीसदी से ज्यादा टूटकर 90.38 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 11.5 फीसदी की गिरावट के साथ 87.9 डॉलर तक आ गया था।
- वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 11.45 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ 83.85 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
- अगर पिछले 9 कारोबारी दिनों की बात करें, तो कच्चे तेल की कीमतों में 30 फीसदी से अधिक की गिरावट आ चुकी है।
निर्यातकों के खिले चेहरे, मालभाड़ा कम होने की उम्मीद
इस समुद्री रास्ते के खुलने से सिर्फ तेल का आयात ही सुलभ नहीं हुआ है, बल्कि भारत के निर्यातकों को भी बड़ी राहत मिली है।
- जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आने से जहाजों के फ्रेट रेट्स यानी मालभाड़े में भी कमी आएगी।
- अमृतसर की कंपनी डीआरआरके फूड्स के एमडी अमित मारवाह ने बताया कि उनकी कंपनी का 18000 टन बासमती चावल बंदरगाहों पर फंसा हुआ है, जो अब आगे बढ़ सकेगा।
- कंपनी को पहले जेद्दा पोर्ट तक सामान पहुंचाने के लिए हर कंटेनर पर 700 डॉलर भाड़ा देना पड़ रहा था, जो युद्ध और रास्ते के बंद होने के कारण 4 से 5 गुना तक बढ़ गया था।
- निर्यातकों के संगठन फियो (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय का कहना है कि अब भारत न केवल पश्चिम एशिया को आसानी से सामान भेज पाएगा, बल्कि यूरोप सामान भेजने के लिए भी यह रूट काफी शॉर्ट हो जाएगा।
- अधिकारियों के मुताबिक, होर्मुज के पश्चिम से भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचने में जहाजों को अब केवल 4 से 6 दिन का समय लगेगा।
