Middle East Crisis:पश्चिम एशिया (Middle East) में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहा तनाव अब सिर्फ एक सैन्य युद्ध नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बहुत बड़े आर्थिक युद्ध में बदल चुका है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर दबाव बनाने और उसे बंद करने की धमकियों के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल का संकट गहरा गया है। लेकिन इस युद्ध के बीच एक और बड़ा खेल चल रहा है जिसने अमेरिका की नींद उड़ा दी है। रूस और ईरान ने मिलकर ‘डी-डॉलराइजेशन’ (De-dollarization) की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, जो सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व (US Dollar Hegemony) को चुनौती दे रहा है।
होर्मुज विवाद और तेल की कीमतों में उबाल
दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर दबाव बनाने के लिए इस जलमार्ग को बाधित करने की रणनीति अपनाई है।
- इसके कारण ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल आया है।
- तेल की बढ़ती कीमतों ने दुनिया भर के शेयर बाजारों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है और निवेशकों को ‘ब्लैक मंडे’ जैसे बड़े क्रैश का डर सता रहा है।
रूस और ईरान का ‘डी-डॉलराइजेशन’ प्लान
अमेरिकी प्रतिबंधों (Sanctions) की काट निकालने के लिए रूस और ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक मास्टरस्ट्रोक चला है।
- दशकों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का व्यापार केवल अमेरिकी डॉलर में होता आया है, जिसे ‘पेट्रोडॉलर’ (Petrodollar) सिस्टम कहा जाता है।
- लेकिन अब रूस और ईरान अपने तेल व्यापार के लिए डॉलर को दरकिनार कर रहे हैं।
- दोनों देश अब तेल के लेन-देन के लिए बार्टर सिस्टम (Barter System) और चीनी मुद्रा ‘युआन’ (Yuan) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं।
- यह रणनीतिक बदलाव सिर्फ प्रतिबंधों से बचने के लिए नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल एनर्जी मार्केट से अमेरिकी डॉलर के दबदबे को हमेशा के लिए खत्म करने की एक सोची-समझी साजिश है।
भारत को मिली एक महीने की विशेष छूट
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और होर्मुज संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा था।
- इस संकट को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन ने वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए भारत और कुछ अन्य देशों को समुद्र में ही रूस के प्रतिबंधित तेल को खरीदने के लिए लगभग एक महीने की विशेष छूट (Waiver) दी है।
- इस छूट के सहारे भारत अपनी तेल आपूर्ति को स्थिर रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अगर ईरान युद्ध लंबा खिंचता है, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि भले ही संकट के इस समय में अमेरिकी डॉलर सेफ हेवन के रूप में मजबूत दिख रहा हो, लेकिन लंबी अवधि में ईरान और रूस की यह ‘युआन डील’ ग्लोबल फाइनेंस के ढांचे को पूरी तरह से बदल कर रख देगी।
