US-Iran War: होर्मुज संकट के बीच पाकिस्तान की बड़ी चाल, शांति वार्ता और परमाणु समझौते में चीन की एंट्री!

US Iran Peace Deal

US Iran Peace Deal:अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही ठप होने और दोनों देशों के बीच लगातार हो रहे हमलों के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। इस महायुद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान अब एक प्रमुख मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। लेकिन कूटनीतिक गलियारों से आ रही ताजा खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान अब इस शांति वार्ता (Peace Deal) और परमाणु समझौते की बातचीत (Nuclear Talks) में चीन (China) को भी शामिल करना चाहता है।

‘इस्लामाबाद अकोर्ड’ और चीन की जरूरत क्यों?

अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत के लिए पाकिस्तान ‘इस्लामाबाद अकोर्ड’ (Islamabad Accord) नाम के एक शांति प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इसमें दो चरणों वाले युद्धविराम (Ceasefire) की योजना तैयार की गई है।

  • इस डील में सबसे बड़ी अड़चन भरोसे की कमी है। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा गारंटी को लेकर अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं कर रहा है।
  • इसी अविश्वास को खत्म करने के लिए पाकिस्तान ने चीन को इस मामले में उतारने की योजना बनाई है।
  • पाकिस्तान चाहता है कि चीन अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए ईरान को सुरक्षा और कूटनीतिक आश्वासन दे, ताकि ईरान बेझिझक शांति वार्ता की मेज पर आ सके।
  • चीन के विदेश मंत्रालय ने भी पाकिस्तान की इस मध्यस्थता पेशकश का खुले तौर पर समर्थन किया है और क्षेत्र में जल्द से जल्द सैन्य अभियान रोकने की अपील की है।

होर्मुज स्ट्रेट का संकट और वैश्विक दबाव

इस युद्ध का सबसे तनावपूर्ण केंद्र ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बना हुआ है। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने के बाद, ईरान ने इस रूट से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

  • चूंकि दुनिया के तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है, इसलिए चीन और पाकिस्तान दोनों चाहते हैं कि यह रूट जल्द खुले।
  • चीन के विदेश मंत्री वांग यी और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के बीच बीजिंग में हुई बैठक में भी वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चिंता जताई गई थी।

परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर फंसा है पेंच

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते में सबसे बड़ा विवाद ईरान के यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाए, जबकि ईरान अपने फ्रीज किए गए अरबों डॉलर के फंड की वापसी और भविष्य में हमलों से सुरक्षा की गारंटी मांग रहा है। अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तान की इस कूटनीति और चीन के समर्थन से पश्चिम एशिया में एक बार फिर शांति बहाल हो पाती है या नहीं।