Iran-US War: ट्रंप के दावे हुए खोखले! अब भी ताकतवर है ईरान की सेना; इधर राजनाथ सिंह ने दिए मध्यस्थता के संकेत

एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान का झंडा, और दूसरी तरफ भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तस्वीर

Iran US War Mediation:पश्चिम एशिया में अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच चल रहा भीषण तनाव रुकने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्धविराम (Ceasefire) बढ़ाने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ एक चौंकाने वाली खुफिया रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान की सेना आज भी बेहद मजबूत है और ट्रंप के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। इसी बीच, जर्मनी दौरे पर गए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बड़ा बयान देकर ईरान और अमेरिका के बीच भारत की मध्यस्थता (Mediation) के स्पष्ट संकेत दिए हैं।

क्या ट्रंप के दावे निकले खोखले? खुफिया रिपोर्ट का खुलासा

हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले किए थे, जिसके बाद दावा किया गया था कि ईरान की सैन्य ताकत टूट चुकी है। लेकिन नई खुफिया रिपोर्ट इसके उलट कहानी बयां कर रही है।

  • रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की सेना और उसकी सैन्य क्षमताएं आज भी पूरी तरह से बरकरार और बेहद मजबूत हैं।
  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के कहने पर सीजफायर को आगे बढ़ाया है, लेकिन ईरान को इस पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं है।
  • ईरान का मानना है कि अमेरिका सिर्फ समय निकाल रहा है। ईरान ने ट्रंप और अमेरिका का यह कहकर मजाक भी उड़ाया है कि हारे हुए लोग युद्ध की शर्तें कैसे तय कर सकते हैं।

पाकिस्तान हुआ फेल, क्या अब भारत कराएगा समझौता?

अमेरिका और ईरान के बीच शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता की कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें पूरी तरह से फेल साबित हुआ है। इस बीच, जर्मनी के बर्लिन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बयान कूटनीतिक हलकों में गूंज रहा है।

  • राजनाथ सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान की कोशिशें भले ही नाकाम रही हों, लेकिन भारत अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
  • उन्होंने कहा कि हर चीज का एक समय होता है। हो सकता है कि कल ऐसा समय आए जब भारत इसमें अपनी भूमिका निभाए और सफलता भी हासिल करे।
  • राजनाथ सिंह ने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण इस कूटनीतिक मामले में बेहद संतुलित है और उन्होंने दोनों पक्षों से युद्ध समाप्त करने की अपील की है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: 500 मिलियन डॉलर का घाटा और भारत की चिंता

इस पूरे युद्ध का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर पड़ रहा है, जिसे अमेरिका ने ब्लॉक कर रखा है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए इसी पश्चिम एशियाई क्षेत्र पर निर्भर है।

होर्मुज बंद होने के कारण ईरान को रोजाना 500 मिलियन डॉलर का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। इस अहम समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए 30 से ज्यादा देशों का महाजुटान हो रहा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे भारत की सुरक्षा के लिए भी गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यवधान कोई दूर की घटना नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है।