US Iran War:पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब एक नया और खतरनाक मोड़ ले चुका है। इस युद्ध में अब चीन की सीधी एंट्री के संकेत मिल रहे हैं, जिसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रातों की नींद उड़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना द्वारा जब्त किए गए एक ईरानी कार्गो जहाज से कुछ ऐसे सुराग और खुफिया जानकारियां हाथ लगी हैं, जिससे व्हाइट हाउस में हड़कंप मच गया है। यह सब दूसरी ‘इस्लामाबाद वार्ता’ (Islamabad Talks) से ठीक पहले हुआ है, जिससे कूटनीतिक समीकरण पूरी तरह से उलझ गए हैं।
अमेरिकी कमांडोज ने ‘तोस्का’ जहाज पर किया कब्जा
अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज में अपनी नाकेबंदी को सख्त करते हुए ‘एमवी तोस्का’ (MV Toska) नाम के एक ईरानी झंडे वाले कंटेनर जहाज पर बड़ी सैन्य कार्रवाई की है।
- अमेरिकी नेवी के डिस्ट्रॉयर ने पहले इस 1000 फीट लंबे जहाज को रुकने की चेतावनी दी थी।
- जब जहाज नहीं रुका, तो उसके इंजन रूम पर सटीक फायरिंग की गई ताकि उसे आगे बढ़ने से रोका जा सके।
- इसके बाद अमेरिकी मरीन कमांडोज ने हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज पर उतरकर उसे पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया।
- राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि जहाज उनके कब्जे में है और अमेरिकी एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि इस विशाल कार्गो शिप के अंदर क्या-क्या छिपा है।
चीन की एंट्री से ट्रंप की क्यों बढ़ी टेंशन?
इस पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू इस जहाज का ‘चाइना कनेक्शन’ है।
- खुफिया ट्रैकिंग डेटा से पता चला है कि 17 साल पुराने एमवी तोस्का ने इसी साल मार्च के महीने में 2 बार चीन के ‘जुहाई’ (Zhuhai) पोर्ट का दौरा किया था।
- आशंका जताई जा रही है कि चीन इस जहाज के जरिए ईरान को उन्नत हथियार, ड्रोन के पार्ट्स या मैनपैड्स (MANPADS) जैसी घातक मिसाइलें सप्लाई कर रहा था, ताकि ईरान अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ सके।
- अगर जब्त किए गए जहाज में चीनी हथियारों की गुप्त खेप पाई जाती है, तो यह सीधे तौर पर अमेरिका और चीन के बीच एक बड़े वैश्विक टकराव को जन्म दे सकता है।
दूसरी इस्लामाबाद वार्ता पर पड़ेगा सीधा असर
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय शांति और मध्यस्थता के लिए जल्द ही दूसरी ‘इस्लामाबाद वार्ता’ होने जा रही है।
- अमेरिका को उम्मीद थी कि वह अपनी कड़ी नौसैनिक नाकेबंदी से ईरान पर भारी दबाव बना लेगा और उसे अपनी शर्तों पर बातचीत की मेज पर झुकने के लिए मजबूर कर देगा।
- लेकिन चीन के इस गुप्त समर्थन और हथियारों की संभावित सप्लाई ने ट्रंप प्रशासन को बैकफुट पर ला दिया है।
- कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि चीन के छिपे हुए समर्थन से ईरान अब इस्लामाबाद वार्ता में अधिक आक्रामक रुख अपना सकता है, जिससे ट्रंप की शांति या दबाव बनाने की योजना खटाई में पड़ सकती है।
चूंकि यह एक ब्रेकिंग न्यूज़ है और अमेरिकी नेवी द्वारा जहाज की सघन जांच अभी भी जारी है, इसलिए कुछ अहम जानकारियां आना बाकी हैं। (पाठकों से अनुरोध: क्या आपके पास इस खबर से जुड़ी कोई अतिरिक्त जानकारी है कि क्या इस जहाज से सच में कोई चीनी मिसाइल प्रणाली बरामद हुई है, या दूसरी इस्लामाबाद वार्ता के मुख्य एजेंडे में कौन-कौन से देश मध्यस्थता कर रहे हैं? कृपया कमेंट करके स्पष्ट करें ताकि हम इस रिपोर्ट को और अधिक विस्तृत बना सकें।)
