China Sending Weapons to Iran:मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भारी तनाव के बीच एक नई और बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। इस घटना ने वैश्विक कूटनीति में खलबली मचा दी है। सोशल मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि ड्रैगन यानी चीन गुपचुप तरीके से ईरान को हथियारों की सप्लाई कर रहा है। यह दावा तब और पुख्ता हो गया जब हाल ही में 4 चीनी कार्गो विमान एक बहुत ही रहस्यमय तरीके से ईरान की राजधानी तेहरान में लैंड हुए।
ट्रांसपॉन्डर बंद कर तेहरान में उतरीं फ्लाइट्स
दरअसल, इस पूरी घटना का खुलासा तब हुआ जब एक जाने-माने कमेंटेटर मारियो नॉफाल ने सोशल मीडिया पर इस मूवमेंट को ट्रैक किया।
- मारियो नॉफाल ने दावा किया है कि पिछले 48 घंटों के भीतर चीन के 4 कार्गो विमान ईरान में गुपचुप तरीके से उतरे हैं।
- सबसे ज्यादा संदेह पैदा करने वाली बात यह है कि इन सभी विमानों ने ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से ठीक पहले हवा में ही अपने ट्रांसपॉन्डर बंद कर दिए थे।
- एविएशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी भी विमान का इस तरह से अचानक ट्रांसपॉन्डर बंद कर लेना कोई सामान्य तकनीकी खामी नहीं हो सकती।
- जानकारों के मुताबिक, लगातार 4 विमानों का एक ही पैटर्न पर इस तरह रडार से गायब हो जाना स्पष्ट रूप से किसी गुप्त ऑपरेशन या सुरक्षा कारणों की ओर इशारा करता है, जिससे यह आशंका गहरी हो गई है कि इन विमानों में हथियार और गोला-बारूद लदा हो सकता है।
शी जिनपिंग के वादे और चीन की सफाई
हालांकि, यह घटना कूटनीतिक रूप से इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस कड़ी चेतावनी के ठीक बाद हुई है।
- कुछ ही दिन पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने डोनाल्ड ट्रंप को यह भरोसा दिलाया था कि चीन ईरान को किसी भी तरह के हथियारों की सप्लाई नहीं करेगा।
- डोनाल्ड ट्रंप ने भी चीन को खुली धमकी दी थी कि अगर वह इस मामले में किसी भी रूप में दखल देता है, तो इसके परिणाम बहुत बुरे होंगे।
- इसके अलावा, इस रहस्यमय लैंडिंग के दावों पर चीन की तरफ से आधिकारिक सफाई भी आ गई है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
- लिन जियान ने स्पष्ट कहा कि चीन द्वारा ईरान को हथियार या सैटेलाइट मदद देने की सभी रिपोर्टें एकदम झूठी और निराधार हैं।
अमेरिका-ईरान सीजफायर और अनिश्चितता का माहौल
वहीं, अगर हम अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा हालात की बात करें, तो 7 अप्रैल को दोनों देशों ने एक युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा की थी।
- इस्लामाबाद में हुई दोनों देशों की बातचीत बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई थी।
- यद्यपि अभी तक किसी भी पक्ष ने युद्ध के दोबारा शुरू होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है।
- ट्रंप ने यह भी कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट को कमर्शियल जहाजों के लिए खोल दिया गया है, लेकिन ईरान के लिए अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी।
कुल मिलाकर, चीन के इन रहस्यमय विमानों की लैंडिंग ने इस पूरे संघर्ष में एक अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
