CG News: जशपुर के 13 गांवों की बदलेगी तस्वीर, CM साय ने किया 119 करोड़ की आधुनिक सिंचाई योजना का शुभारंभ

Bagia M-CAD Irrigation Project

Bagia M-CAD Irrigation Project:छत्तीसगढ़ के किसानों को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अपने गृह ग्राम जशपुर जिले के बगिया में समृद्धि एम-कैड (M-CAD) योजना के तहत ‘बगिया दाबित उद्वहन सिंचाई प्रणाली‘ के निर्माण कार्य का शानदार शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू और कृषि मंत्री रामविचार नेताम सहित कई बड़े जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

‘हर बूंद से अधिक उत्पादन’ का नया मॉडल

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं है, बल्कि “हर बूंद से अधिक उत्पादन” की सोच का सशक्त प्रतीक है। इस परियोजना के तहत पारंपरिक नहर प्रणाली को हटाकर आधुनिक ‘प्रेसराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क’ (अंडरग्राउंड पाइपलाइन) बिछाया जाएगा। इस आधुनिक तकनीक के कई बड़े फायदे होंगे:

  • जल का अपव्यय पूरी तरह रुकेगा।
  • भूमि अधिग्रहण जैसी कोई समस्या नहीं आएगी।
  • वर्षा पर निर्भर रहने वाले किसानों को सालभर सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।

देश भर में छत्तीसगढ़ का एकमात्र चयनित प्रोजेक्ट

यह योजना पूरे देश में अपनी तरह का एक अनूठा मॉडल है। आपको बता दें कि देश के 23 राज्यों में स्वीकृत 34 एम-कैड परियोजनाओं में छत्तीसगढ़ का बगिया क्लस्टर एकमात्र चयनित परियोजना है। भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा अप्रैल 2025 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत बगिया प्रोजेक्ट के लिए केंद्र ने 95.89 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। वहीं, इस पूरी परियोजना की लागत लगभग 119 करोड़ रुपये है।

13 गांवों के 4933 हेक्टेयर क्षेत्र में होगी सिंचाई

यह परियोजना कांसाबेल विकासखंड के बगिया क्लस्टर में मैनी नदी पर तैयार की जा रही है। इससे बगिया, उसकुटी, रजोती, सुजीबहार, चोंगरीबहार, बांसबहार, डोकड़ा, सिकरिया, पतराटोली, गहिराडोहर, बीहाबल, नरियरडांड और ढुढुडांड सहित 13 गांवों को सीधा फायदा मिलेगा और लगभग 4933 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी।

SCADA और IoT जैसी एडवांस तकनीक का इस्तेमाल

इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका तकनीकी स्वरूप है। इसमें सौर ऊर्जा आधारित विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ SCADA (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन) और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) का इस्तेमाल किया जाएगा। डेटा के आधार पर यह तय होगा कि किस खेत में कब और कितना पानी छोड़ना है।

अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट अगले 6 महीने में पूरा कर लिया जाएगा। शुरुआती 5 साल तक इसके संचालन का जिम्मा ठेकेदार का होगा, जिसके बाद इसे ‘जल उपभोक्ता समिति’ (जिसमें महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होगी) को सौंप दिया जाएगा।